JIADA Regulations 2026 के मसौदे पर उद्योग संगठनों के साथ महत्वपूर्ण बैठक, MD JIADA ने अपनी टीम के साथ प्रावधानों पर धैर्यपूर्वक विस्तृत विचार-विमर्श किया जमशेदपुर, 8 अगस्त 2026: JIADA Regulations 2026 के मसौदे को लेकर आज उद्योग एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रबंध निदेशक (MD), JIADA श्री वरुण रंजन, IAS स्वयं अपनी टीम के साथ उपस्थित हुए तथा उन्होंने प्रत्येक प्रावधान को धैर्यपूर्वक क्रमवार सुना एवं उन पर विस्तार से चर्चा की। साथ में श्री प्रेम रंजन, क्षेत्रीय निदेशक (RD) तथा श्री दिनेश रंजन, Regional Deputy Director सहित JIADA के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। SCCI की ओर से अध्यक्ष श्री मानव केडिया, उपाध्यक्ष श्री हर्ष बकरेवाल एवं सचिव श्री विनोद शर्मा तथा ASIA, Laghu Udyog Bharati, ISRO, FJCCI के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। वर्ष 2016 के नियमों के तहत आवंटित ऐसी इकाइयां, जो उत्पादन में हैं परंतु जिनका DOP/IOP औपचारिक रूप से दर्ज नहीं हुआ है, अधिसूचना की तिथि से 6 माह के भीतर IOP जारी करने हेतु आवेदन कर सकेंगी। बिजली खपत, GSTN रिटर्न एवं EPFO रिकॉर्ड के आधार पर Deemed IOP प्रमाण-पत्र जारी होगा, जिससे इकाइयां Performing Allottee Certification, नवीनीकरण एवं घटित Penal Rent जैसे लाभों की पात्र बनेंगी, हालांकि बकाया राशि माफ नहीं होगी। क्षेत्रीय वर्गीकरण पर बताया गया कि प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र को निवेशक मांग के आधार पर Saturated, Active, Emerging एवं Priority Zone में बांटा जाएगा, जिसका असर भूमि दर पर पड़ेगा। राजमार्ग किनारे के भूखंडों को Prime Plot के रूप में A+, A, B+ एवं B ग्रेड में चिन्हित कर Base Price पर क्रमशः 20%, 15%, 10% एवं 5% तक प्रीमियम तथा प्रतिस्पर्धी बोली से आवंटन का प्रावधान रखा गया है। भूखंड आरक्षण में 40% सूक्ष्म-लघु उद्यमों हेतु, तथा 10%-10% क्रमशः PAF, SC/ST उद्यमियों एवं महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों हेतु आरक्षित रहेगा। आवंटन मूल्य निर्धारण में Land Lease Premium के अतिरिक्त JIADA Charges के रूप में LLP का 12% — (Institutional Charge 7%, Processing Charge 3% तथा Investor Facilitation Charge 2%)— निश्चित एवं गैर-रियायती रूप से लागू होगा। Land Rent एवं Maintenance Charge में प्रतिवर्ष स्वतः 5% वृद्धि तथा भूमि लागत पर अधिकतम 50% तक की संचयी छूट सीमा पर भी चर्चा हुई। भूखंड विज्ञापन से पूर्व सड़क, नाली, सीमांकन जैसी बुनियादी सुविधाएं तथा Possession Readiness Certificate अनिवार्य होंगे, जबकि जल-विद्युत जैसी उन्नत सुविधाएं 24 माह में पूर्ण करनी होंगी। स्वामित्व/संरचना में परिवर्तन के तहत मूल आवंटी की हिस्सेदारी 50% या अधिक बनी रहने पर मात्र Rs.10,000 की प्रोसेसिंग फीस पर सूचना पर्याप्त होगी; 25% से 49% हिस्सेदारी लेने पर प्रचलित LLP का 5% शुल्क तथा MD की स्वीकृति आवश्यक होगी, जबकि 50% या अधिक हिस्सेदारी हस्तांतरण को Transfer माना जाएगा। विलंब से सूचना देने पर Rs.10,000 से Rs.2,00,000 तक दंड का प्रावधान भी रखा गया है। उद्योग संगठनों को यह विशेष रूप से अवगत कराया गया कि Joint Venture, Sub-Lease तथा Sick Units Revival योजनाएं JIADA के इतिहास में पहली बार इस Regulation में शामिल की जा रही हैं, जो उद्योगों को पूंजी, साझेदारी एवं पुनरुद्धार के नए अवसर प्रदान करेंगी। संयुक्त उद्यम (Joint Venture) की नई व्यवस्था के अंतर्गत तीन-स्तरीय संरचना प्रस्तावित है — Tier A में 26% तक इक्विटी पर केवल प्रोसेसिंग फीस पर उत्तर-स्वीकृति; Tier B में 26% से 49% इक्विटी पर MD की पूर्व-स्वीकृति के साथ IOP के बाद के वर्षों के आधार पर प्रचलित LLP का 10%, 7%, 5% अथवा 3% JV Fee, जिसमें Technology Transfer, Export-oriented, रोजगार-सघन एवं Sick Unit Revival JV पर 15% से पूर्ण छूट तक की अतिरिक्त रियायत का प्रावधान है; Tier C में 50% या अधिक इक्विटी को सीधे Transfer मानते हुए Transfer Fee लागू होगी। उप-पट्टा (Sub-Lease) की नई व्यवस्था के तहत निर्मित क्षेत्र के 10% तक बिना किसी शुल्क के केवल सूचना देना पर्याप्त होगा; 30% तक क्षेत्र के लिए स्वीकृति के साथ वार्षिक भाड़े का 5% शुल्क तथा Managed Industrial Estate हेतु बोर्ड की स्वीकृति के साथ 5% शुल्क देय होगा। न्यूनतम 60% उत्पादन क्षमता (Capacity Gate) की शर्त पूरी करनी होगी तथा प्रतिबंधित गतिविधियों में सब-लेटिंग पर तत्काल निरस्तीकरण एवं दंड का प्रावधान है। आवंटन हस्तांतरण के तहत मानक Transfer पर Transfer Price का 15% शुल्क देय होगा, जिसमें 3 वर्ष तक कोई छूट नहीं, 3 से 10 वर्ष तक 85% तथा 10 वर्ष से अधिक पर 70% की छूट रहेगी। गैर-कार्यरत इकाई पर 50% शुल्क, Performing Allottee को अतिरिक्त 5% छूट तथा समूह के भीतर हस्तांतरण पर मात्र 5% शुल्क निर्धारित है। विलय एवं विभाजन में समान प्रोमोटर समूह पर 1% Merger Fee तथा नियंत्रण परिवर्तन पर पूर्ण Transfer Fee लागू होगी। पट्टाधृत अधिकारों के बंधक पर बताया गया कि आवंटी केवल अनुसूचित बैंकों अथवा RBI-मान्यता प्राप्त संस्थानों के पास ही अधिकार बंधक रख सकेंगे, जिसके लिए NOC 15 कार्य दिवसों में जारी होगी। JIADA का बकाया सदैव प्रथम प्रभार रहेगा तथा ऋण चूक पर JIADA को 30 दिनों के भीतर Right of First Refusal का अधिकार रहेगा। गतिविधि परिवर्तन में छोटे बदलाव पर Rs.5,000, बड़े बदलाव पर Rs.25,000 तथा पूर्ण रूपांतरण पर Rs.2,00,000 का शुल्क प्रस्तावित है। बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार (Sick Units Revival) की नई योजना के तहत बीमार घोषित इकाइयों को 12 माह की अवधि, जिसे संतोषजनक प्रगति पर 24 माह तक बढ़ाया जा सकेगा, प्रदान की जाएगी। इस अवधि में Penal Rent की पूर्ण माफी, विलय पर 5% रियायती शुल्क, हस्तांतरण पर Transfer Fee में 25% छूट, तथा मूल बकाया के 80% पर One-Time Settlement के साथ विलंब ब्याज की पूर्ण माफी का प्रस्ताव है, ताकि बंद इकाइयां पुनः चालू हो सकें। भूमि आवश्यकता एवं नियोजन के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम 55% भूमि औद्योगिक भूखंडों हेतु, न्यूनतम 10% Green Zone हेतु आरक्षित रखने तथा विज्ञापन से पूर्व बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अनिवार्यता का प्रावधान है। भविष्य की भूमि आवश्यकताओं हेतु Land Expansion Corpus Fund के गठन का भी प्रस्ताव है, जिसे आवंटन शुल्कों से वित्तपोषित किया जाएगा। उद्योग संगठनों ने एकमत से कहा कि JIADA Regulations 2026 उद्योगों के लिए सरल, स्पष्ट, पारदर्शी एवं Ease of Doing Business के अनुरूप होने चाहिए, विशेष रूप से नई शुरू की गई योजनाओं तथा हस्तांतरण, विलय एवं बंधक से जुड़े शुल्कों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई गई। SCCI ने कहा कि JIADA के नियम उद्योगों के विकास को सुगम बनाने वाले तथा जटिलताओं से मुक्त होने चाहिए। MD JIADA श्री वरुण रंजन, IAS ने अपनी टीम के साथ प्रत्येक प्रावधान पर धैर्यपूर्वक सुझाव सुने और आश्वस्त किया कि सभी सुझावों को Regulations अंतिम रूप देते समय गंभीरता से शामिल किया जाएगा। बैठक सकारात्मक एवं रचनात्मक वातावरण में संपन्न हुई तथा निरंतर संवाद के माध्यम से औद्योगिक विकास को गति देने पर सहमति बनी।